माना दोस्ती का रीश्ता खून का नही होता
लेकीन खुन के रीश्ते से कम भी नही होता
दोस्ती मे एक बात मुझे समझ नही आती है
दोस्त मे लाख बुराई हो उसमे अच्छाई ही क्यु नजर आती है
दोस्त बीठाता है आपको सर आखो पर
आपकी सारी परेशानी लेता है अपने उपर
आप की गलती सारी दुनीयासे चुपाता है
खुद के अच्छे कामो का शेर्य भी आपही को देता है
दोस्त होता है ऐसे
दीयो के लीये बाती जैसे
अन्धो के लीये लाठी जैसे
प्यासे के लीये पानी जैसे
बच्चे के लीये नानी जैसे
दीयो के लीये बाती जैसे
लेखक के लीये कलम जैसे
बीमार के लीये मलम जैसे
कुभार के लीये माती जैसे
कीसान के लीये खेती जैसे
भ्कत के लीये वरदान जैसे
मरने वाले के लीये जीवनदान जैसे
अन्त मे आप से एक ही बात है कहना
दोस्त को बुरा लगे ऐसा कोई काम ना करना
खुद भी खुश रहना और दोस्तो को भी रखना
चाहे कीतनी भी बडी मुशकील हो दोस्त का साथ ना छोडना
जाते जाते मेरी एक बीन्ती है आप से
अपने प्यारे दोस्त को ये कवीता जरुर सुनाना
मैने तो मेरा फ़र्ज नीभाया
अब आप्को है अपना नीभाना
This message is from Mr.Deepak Sharma's collection
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